“विश्व शांति के नाम पर अमेरिका का दमन: ईरान संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय पंगुता”



एक संप्रभुता संपन्न देश को जब एक तथाकथित विश्व शांति के पक्षधर अमेरिका द्वारा बर्बाद किया जाता है और विश्व के सभी देश मौन अथवा कुछ तो उसके पक्ष में बयान जारी करते है तो ये  पूरी लोकतांत्रिक समझौतों तथा सम्पूर्ण मानव द्वारा किया गया विश्वास घात होता है।

संयुक्त राष्ट्र भी अमेरिका का पंगु है जब उसके हाथ मे कुछ है ही नहीं तो क्या फायदा उसे अस्तित्व का उसे खुद को भंग कर लेना चाहिए|

गाजा के मासूम बच्चे हो या ईरान की मासूम बच्चियाँ इन सभी के हत्यारे अमेरिका और इजराइल है और उसके सहयोगी भी है|

और अरब देश के सभी हुक्मरान भी मैदान ए हश्र में ये किस तरह सामना करेंगे नबी -ए- करीम सल्लाहु अलैहिवासलम का क्या ये अनजान है, या ये कुरान नहीं पड़ते| 

ईरान आज सिर्फ इस लिए युद्ध में है क्यों कि उसने अमेरिका के आगे घुटने नहीं टेके।

और युद्ध का मक़सद कुछ और ही है|

बम बनाने की तकनीक ईरान के पास भी है पाकिस्तान के पास भी और भारत के पास भी , इनमें से दो के पास बम भी है , इरान ने वादा किया था और है कि वह बम नहीं बनाएगा , अब खेल देखिये, लेकिन पहले कुछ पॉइंट्स पर गौर कर ले -

1. IAEA की कम से कम 11 या 19 reports ( periodical इंस्पेक्शन के बाद जारी ) है कि ईरान समझौते के सारे अनुबंधों का अक्षरशः पालन कर रहा है | 

2. JCPOA से अमेरिका ( ट्रम्प के पिछले TENURE में ) खुद बाहर आया , यह संधि का सरासर उल्लंघन था , किसी भी bilateral arrangement से अकारण बाहर आना विश्वासघात है |

3 . कल शहीद हुए ईरान के सुप्रीम लीडर का फतवा भी था कि ईरान कोई न्यूक्लियर बम नहीं बनाएगा ( इस फतवे को ट्रम्प , एरदोगान जैसे बाकी अन्य नेताओं की तरह टुच्ची बयानबाज़ी न समझिए कि आज कुछ कल कुछ , इसे रघुकुल रीति की तरह समझिए ) |

4 -  ईरान खुद NPT का signatory है जबकि भारत तमाम दबाव के बावजूद इस पर हस्ताक्षर करने को तैयार नही हुआ पाकिस्तान का मुझे याद नही गूगल कर ले | 

5 - ट्रम्प ने अभी पिछले हमले में ईरानी न्यूक्लियर साइट्स पर BUNKAR BUSTERS बम बरसाने के बाद खुद घोषणा की कि हमने ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटीज़ को OBLITERATE कर दिया है |

6 - ओमान के जो MEDIATOR थे वह TV इंटरव्यूज में यह भी बता रहे है कि जेनेवा में चल रही हालिया बातचीत मे अमरीकी इस्रायली हमले के ठीक पहले ईरान ने यह भी मान लिया था कि वह कभी बम नही बनाएगा | उसके अगले दिन हमला |

7 - 8 महीने पहले भी कतर में कई राउंड की बातचीत हो रही थी और जिस राउंड में किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने का इमकान था उसके ठीक पहले की रात इसराइल ने हमला कर दिया ताकि कोई समझौता हो ही न सके |

अब आप बताइए कि कोई देश और कितनी गारंटी दे , कैसे दे .... 

फ़र्ज़ करे कल को ट्रम्प को अपनी GEO-POLITICAL स्ट्रेटेजी में इंडिया मिसफिट दिखे और वह इंडिया से कहे कि तुम अपना बम डिसेबल कर दो या हमको दे दो और यह समझौता करो कि कभी न्यूक्लियर बम नहीं बनाओगे , NPT पर साइन करो तो हम क्या करेंगे ? 

और हम यह सब करना मंजूर भी कर लें तब भी वह अपने B52 और B 2 BOMBERS से हमारे न्यूक्लियर ठिकाने तबाह कर दे तो , हमारे सुप्रीम लीडर सहित CDS , सेनाध्यक्षो , ISRO चीफ , सेकेंड जनरेशन के नेताओ , सैनिक अफसरों और वैज्ञानिकों को मार दे तो  ..... 


तो , तो , तो ...यही बहुत बड़ा तो है , तो सारी दुनिया का इस पागल हाथी से सामना है , यह हाथी दुनिया के लिए खतरा है, और इसका बच्चा भी |

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