मेरी मैम
जब आप से हम स्कूल के दिनों में मिला करते थे तो बस आप को
ही देखा करती थे| उस वक्त तो दिल और मैं दोनों ही बच्चे थे|
जब वो कक्षा में आती तो आँखे उनके सिवाए और किसी को नही
देखता बस उनकी मीठी आवाज को ही सुनने में मेरी पूरी घंटी ही निकल जाया करती थी|
आज जब उन्हें वर्षों बाद देखा तो पुरानी यादें ताज़ा हो उठी|
वो अब भी उसी प्यार भरे मुस्कान के साथ ही किसी से बातें किया करती हैं|
मैंने उन्हें रास्ते में देखा लेकिन वो मुझे नही देख सकी,
मेरे दिल मचलने लगा की मैं उनसे बात करु|
लेकिन अब तक वर्षों बीत चुके थे तो थोडा डर लग रहा था तो
मैंने उनसे बात किये बिना ही उनके पीछे पीछे चलने लगा|
उन्हें अहसास हुआ कोई मेरा पीछा कर रहा है, लेकिन उन्होंने
ज्यादा ध्यान नही देते हुए बस चलती गई, और मैं भी उनके पीछे –पीछे चलता गया|
कुछ देर बाद वो एक गली में मुड़ गई सो तो मैं भी मुड़ गया| वो
गली कुछ जानी पहचानी लग रही थी| मैंने देखा वो एक मकान में अन्दर जा रही है! मैं
अब वही ठहर गया, और चारो तरफ देखने लगा और सोचने लगा अन्दर जाऊं या नहीं|
फिर कुछ देर बाद मैं वहां से वापस आने लगा वो मुझे छत पर से
देख रही थी, लेकिन मुझे पता नही था की वो
मुझे देख रही है|
ये और कोई नही मेरी नर्सरी की गणित की अध्यापिका थी|
मुझे उनसे बचपन में प्यार हो गया था, जब भी मेरे कक्षा में
आती तो मुझे देख कर सबसे पहले मुस्कुराती थी और मैं भी मुस्कुरा देता था| वो जब तक
मेरे क्लास में रहती मैं अपनी शीट पर कम और उनके चेयर के पास ज्यादा नज़र आता था,
यहाँ तक की क्लास के सरे बच्चे मुझसे कहते थे मैम तुमको बहुत मानती है तो मैं और
ज्यादा खुश हो उठता था, जब वो मुझे पढ़ती तो मैं बस उन्हें ही देखता तो वो हस पड़ती
और मेरे शीट से बुला कर अपने पास बैठा लिया करती|
एक दफा मुझे उन्होंने क्लास वर्क दिया और मैं लिख नही प्
रहा था तो मैं चुपके से रोने लगा और वो बच्चों को वर्क देने में व्यस्त थी| जब
उनकी नज़र मुझपे पड़ी तो वो तुरंत चेयर से उठ के मेरे पास आयी और पूछने लगी क्या हुआ
है क्यों रो रहे हो?
अपने हाथों से मेरे आंसूओं को पोछने लगी और उनका प्यार देख
मुझे और रोना आने लगा|
तो मुझे वो लेकर आखिरी वाले क्लास में गई जिसमे क्लास नही
चला करता था| वो मुझे प्यार से पूछने लगी क्या हुआ है ? क्यों रो रहे हो कोई मारा
है ? या किसी ने कुछ बोला है| मैं और तेज़ी से सिसकियाँ लेने लगा, वो मुझे अपने गोद
में बिठा के गले लगा ली और कहने लगी चुप हो जाओ नही रोते, मैं माँ- माँ कह के रोने लगा|
तो उन्होंने बोला माँ की याद आ रही है? मैंने रोते और
सिसकियाँ भाते हुए सर को हिलाया हाँ , वो मुझे और जोर से
पकड़ ली और और उनका गला भी भर आया| वो मुझे कहने लगी आप की मम्मी भगवान के पास से
देख रही है| आप ऐसे रोओगे तो वो भी रोने लगेंगी, वो मुझे गोद में ही बैठा के मेरे
आँसू अपने रुमाल से पोछने लगी|
फिर मैं कुछ देर बाद चुप हुआ तो अपने साथ मुझे क्लास में
लाकर बैठाई| और मेरा हाथ पकड़ के मेरे पास बैठे रही|
घंटी ख़तम हो गई तो भी कुछ देर तक वो मेरे पास बैठी रही, और
जब जाना हुआ तो दुसरे टीचर से बोल के गई आर्य को देखिए गा अगर रोये तो मुझे बुला
दीजियेगा वो टीचर बोली तुम जाओ नही रोयेगा अगर रोयेगा तो बुला देंगे|
उनका घंटी बगल के क्लास में थी| वो उस क्लास में से बार-
बार मुझे देख रही थी| कुछ देर बाद मैं अपने दोस्तों के साथ हसने और पढने लगा| तब
जाके उनको राहत मिली|
चार घंटी बीत चुकी थी अब
लंच की घंटी बजी मैं अपने दोस्तों के साथ फिल्ड में खेलने के लिए निकल गया,
मैम मुझे क्लास में ढूंढ रही थी बच्चों से पूछी तो किसी के बताया वो खेलने गया|
तब वो खिड़की मुझे
देख रही थी मेरी नज़र उनपर पड़ी तो वो मुझे बुलाई मैं दौड़ता- दौड़ता उनके पास
आया|
उन्होंने मुझसे पूछा लंच किये हो?
मैंने झूठ बोल दिया हाँ!
उन्होंने मेरे बैग से लंच निकला और जब खोला तो भरा हुआ था|
उन्होंने कहा आप मुझसे झूठ बोले हो और झूठ बोलना बुरी आदत
होती है| अब कभी झूठ नही बोलना|
मैं उन्हें देखा और सर को हिलाया
फिर उन्होंने मुझे लंच ख़तम करने को कहा मैंने थोडा सा कर के
रखने जा रहा था तभी उनकी नज़र मुझपे पड़ी और वो बोली पूरा ख़तम करो फिर खेलने जाना|
मैंने बोला नही अब नही हो गया मैं और नही खा पाउँगा|
वो उठ के मेरे पास आयी और मेरा लंच लेकर मुझे अपने अपने
हाथों से खिलाने लगी और मैंने सारा लंच
ख़तम कर दिया|
लंच खत्म हुआ और हम सब अपने –अपने क्लास में आ गये और आज का
स्कूल ख़त्म हुआ फिर हम सब अपने घर को जाने लगे मैम का घर रस्ते में ही पड़ता था मैं
उनके साथ- साथ उनके घर तक जाया करता था|
जब मैं सुबह स्कूल आता तो बस मुझे उनका ही इंतज़ार रहता था फिल्ड में झूले पर बैठ बस गेट की तरफ
उन्हें ही देखा करता था की वो कब आयेंगी|
और जब वो आती तो सबसे पहले उनकी नज़र मुझपे पड़ती और वो
हँसाने लगती|
मेरा गाल उन्हें और जो बड़े क्लास की दीदी थी वे सभी मेरे
गाल को ही पकड़ के मुझे खेलाया करते थे|
जब कभी दीदी लोग मेरे गाल को थोडा तेज़ से खिंच के खेलती तो
मैं उन्हें डांटती फिर वो सब लोग मुझे
परेशान करने लगती थी|
प्रार्थना की घंटी लगी सभी लोग फील्ड में इकट्ठा हुए और
प्रार्थना ख़त्म होने के बाद सभी लोग अपने क्लास में चले गये|
मुझे प्रार्थना में संगीत वाली मैम का हरमुनियम सुनना बहुत
पसंद था|
मेरे क्लास की पहली घंटी खत्म हुई अब तो दूसरी घंटी आयी और
जब वो क्लास में आयी तो सभी बच्चे गुड मोर्निंग बोलते हुए खड़े हुए और मैं बोलने के
साथ मुस्कुरा भी रहा था|
सभी बच्चे बैठ गये और मैम के कहा गिनती वाली किताब निकालो, सभी बच्चों के किताब निकाल ली फिर मैम ने मुझे
बुलाया आर्य आओ बोर्ड से पढ़ो-
मैं गया और पढ़ाने
लगा मैं टवेंटी नाइन तक पढ़ा के रुक
गया क्यों की थर्टी मैं बोल नही पाता था मैंम बोली रुक क्यों गये आगे पढ़ाओ मैं नही
पढ़ाया मैम चेयर से उठ के आयी और मेरे पास
कड़ी हो गई और बोली चलो मेरे साथ बोलो-
मैंने उनके साथ पढ़ना शुरू किया जब वो बोलती थर्टी मैं बोलता
टट्टी, टट्टी वन, टट्टी टू. आदि ऐसे ही बोलता जाता और वो खूब हँसाने लगती और बच्चे
भी हसने लगते-
फिर मैं बोलता ही नही तो वो बच्चों को शान्त करा के बोलती
जो हंसेगा वो क्लास से बाहर जायेगा|
मुझे फिर पढ़ती मैं फिर वैसा ही पढ़ता और बच्चे तो नही हंसते
लेकिन मैम अपने दुपट्टे से मुंह को छुपा के हंसती थी तो फिर मुझे भी हंसी आ जाती
थी|
और फिर वो मुझे बैठा देती थी|
एक बार एक 11 क्लास
दीदी मुझे केलते हुए बोल रही थी कितना क्यूट लगता है बड़ा होता तो मैं इससे
शादी कर लेती| मैम ऑफिस से सुन रही थी अभी बोली हो फिर से कहना जरा, दीदी मुझे छोड़
के जल्दी से भाग गई|
और मैम हंसने लगी|
ऐसे ही साल- बीतता गया और मैं क्लास 3rd
में पहुँच गया और
तब तक मेरी एक बेस्ट फ्रेंड बन चुकी थी| अब मैं थोडा सा बड़ा हो चूका था अब मैम की
एक ही घंटी हम लोगों के क्लास में थी|
अब दोस्तों के साथ व्यस्त रहना सिख चूका था|
और मेरी बेस्ट फ्रेंड तानी उसके साथ मैं ज्यादा रहना पसंद करता था तो मैम मुझे उसके
पास ही बैठा देती थी|
अब ये साल ख़त्म होने को आया और मैम की शादी भी कही लग चुकी
थी|
मुझे जब पता चला की वो चली जाएँगी तो मुझे भी पढने का मन
नही कर रहा था मैं उन्हें देख के मुस्कुराना बंद कर दिया था|
उन्हें ये बात पता चली तो वो मुझे मिलने आई और कहने लगी जब
तुम बड़े हो जाओगे तो तुम्हारी भी शादी होगी|
और मैं अभी थोड़ी जाउंगी वो तो अगले साल होगी न!
अभी तो मैं यही रहूंगी, अच ये बताओ तुम को नंबर याद हुआ
टट्टी वाला? तो मुझे हंसी आने लगी|
और वो भी हंस पड़ी|
परीक्षा सुरु हुआ और वो अब स्कूल आना बंद कर दी| मैं पूछा
संगीत वाली मैम से तो पता चला 2-3 दिन बाद उनकी शादी है|
मैं अब तानी के साथ खुश रहने लगा था, पर दिल और मन बार बार
उन्हें ढूंढ़ता रहता था|
परीक्षा जब ख़त्म होने को आया तो पता चला तानी भी स्कूल छोड़
के जा रही है|
मुझे अच नही लगा|
परीक्षा ख़त्म हुआ और तानी भी चली गई|
अब किसी तरह मैं वहाँ पढने गया लेकिन मन नही लग रहा था पढने में| फिर कुछ दिन गुजर जाने के
बाद पता चला की मैम की शादी स्कूल के पास हुई है , तो मैं अब हर रोज जब स्कूल से
आता या जाता तो रस्ते में रुक के जरुर देखता|
लेकिन वो दिखती ही नही|
उसके कुछ महीनो बाद तानी का भी पता चल गया वो अब घर बदल के
दुसरे जगह चली गई थी|
अब तो मन स्कूल में नही बल्कि स्कूल से बहार लगता था|
एक बार मैं स्कूल से जा रहा था तो उन्हें छत पर कपड़ा सुखाते
देखा लेकिन वो मुझे नही देख सकी|
मैं बहुत खुश था|
मैं भी एक साल पढ़ के स्कूल से निकल गया|
और अज तक मेरी मुलाक़ात माम से नही हुई थी, और न ही तानी से|
आज जब वो छत से देख रही थी तो शायद हो थोडा थोडा पहचान रही
थी|
पर आप आर्य बड़ा हो गया था दाढ़ी, मूछ निकल चुकी थी तो भला
कैसे पहचानती ?
मैम के घर पे एक
शॉप खुला है उनके 2 बच्चे है| आर्य कभी कभी उनके शॉप पे जाता है सामान लेने और उन्हें देखता है पर बचपन में जैसे देखता था
वैसे नही|
जब वो देखती हैं तो नज़ारे निचे कर लेता है| अब तो उन्हें
देख के मुस्कुराना भी नही आता| आर्य उन्हें अपना परिचय नही देता है वो दुकानदार और
ग्राहक के नजरिये से ही रहना पसंद करता
है|
आज तक मुझे ऐसी मैम नही मिली| मैं उन्हें अभी तक याद करता हूँ, और मुझे
लगता है मैं पूरी जिंदगी उन्हें भूल नही सकता|
written by- tarif ansari k.

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