हंगामा है क्यों बरपा उपाध्यक्ष ही तो माँग है, सरकार की कुर्सी तो नहीं ली है...

 मारा संविधान न तो कठोर है और न ही ज्यादा लचीला, जिस इरादे से आप इसका  इस्तेमाल करना चाहते है कर सकते है| परंतु संविधान की आत्मा कृत्रिम न होकर प्रकृति है, और प्रकृति कभी भी अन्याय का साथ नहीं देती है|
हमारे संविधान को निष्पक्षता और प्रगति के मूल्यों के साथ देशवासियों को सौंपा  गया है|
इसकी इस उपलब्धि को बनाए रखना भारतवासियों का कर्तव्य है, जो इन्होंने हाल ही मे हुए लोकसभा चुनाव 2024 में दिखाया भी है|
सरकार के बढ़ते प्रभाव को एक मजबूत विपक्ष दे कर उसे सीमित कर दिया है|
इसी प्रभाव की कड़ी में एक पद लोकसभा उपाध्यक्ष का भी है|

                                                 
                           PHOTO- PTI

लोकसभा उपाध्यक्ष 

भारत की संसद के निम्न सदन लोक सभा उपाध्यक्ष का  पद भारत के प्रमुख संवैधानिक पदों में से एक है । संसद के निचले सदन ,अर्थात लोक सभा में अध्यक्ष के अनुपस्थित रहने पर सदन के कार्यवाही की जिम्मेदारी लोक सभा के उपाध्यक्ष पर ही होती है । 

कार्य एवं शक्तियां 

  • लोक सभा के अध्यक्ष का पद रिक्त होने पर उपाध्यक्ष के उपर ही उसके  कार्यों की जिम्मेदारी होती  है। सदन की बैठक में अध्यक्ष की अनुपस्थिति की स्थिति  में उपाध्यक्ष, अध्यक्ष के तौर पर काम करता है। दोनों ही स्थितियों में वह अध्यक्ष की शक्ति का निर्वहन करता है। संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में भी अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष पीठासीन अधिकारी के तौर पर कार्य करता  है।
  • यहाँ यह ध्यातव्य  है कि उपाध्यक्ष, अध्यक्ष का  अधीन नहीं होता । वह प्रत्यक्ष रूप से केवल  संसद के प्रति उत्तरदायी होता है।
  • जब  भी उपाध्यक्ष को किसी संसदीय समिति का सदस्य बनाया जाता है तो वह  उस समिति का पदेन  सभापति होता  है। यह भारतीय संविधान द्वारा लोक सभा उपाध्यक्ष  को  दिया गया  एक विशेषाधिकार है।
  • अध्यक्ष की ही तरह, उपाध्यक्ष भी जब पीठासीन होता है, तब वह सदन में  मतदान  नहीं कर  सकता। केवल 2 पक्षों के बीच  मत (वोट) बराबर होने की स्थिति  में ही उसे मतदान के प्रयोग का अधिकार  है।
  • जब उपाध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव सदन के विचाराधीन हो तब  वह पीठासीन नहीं हो सकता ( हालांकि उसे सदन की बैठक  में उपस्थित रहने का अधिकार है ) ।
  • जब अध्यक्ष सदन में पीठासीन होता है तो उपाध्यक्ष सदन के अन्य दूसरे सदस्यों की तरह होता है । उसे सदन में बोलने, कार्यवाही में भाग लेने और किसी प्रश्न पर मत देने का अधिकार है।
  • उपाध्यक्ष संसद द्वारा निर्धारित किए गए वेतन व भत्ते का हकदार है जो भारत की संचित निधि (Consolidated fund)  द्वारा देय होता है ।
  • परम्परानुसार यह प्रथा थी की लोक सभा के  अध्यक्ष व उपाध्यक्ष  सत्ताधारी दल के ही होंगे | किंतु वर्तमान में  अध्यक्ष सत्ताधारी दल से जबकि   उपाध्यक्ष आमतौर पर मुख्य विपक्षी दल से चुना जाता है ।
  • लोक सभा का  उपाध्यक्ष  पद धारण करते समय कोई  शपथ या प्रतिज्ञा नहीं लेता है ।
ज्ञातव्य हो 17 वीं लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद रिक्त था|

18वीं लोकसभा में अध्यक्ष ओम बिरला जी को चुने जाने के बाद उपाध्यक्ष पद के लिए संसद में सरगर्मी बढ़ी हुई है|
हालांकि त्रिमूल कॉंग्रेस द्वारा अवधेश प्रसाद को उपाध्यक्ष बनाने की मांग की गई है, जिसपे सहमति आम आदमी पार्टी ने भी भारी है|

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ