इश्क़ उन्हे भी है
देखो ऐसा नहीं है तुम ख़ूबरूरत नही हो, तुम बेहद खूबसूरत हो,
पर इन खूबसूरती के पीछे कुछ शरारतें है तुम्हारी, डर उन्हीं से है...
तुम हज़ार दावें करती हो, तुम्हें इश्क़ नहीं होगा, काश! जबां की बातें ही दिल मान लेता,
कम्बख़त इसको सब ख़बर होती,
चलो मान लेता तुम्हे इश्क़ नहीं होगा, पर मेरा क्या?
शायद इश्क़ न सही मग़र मोहब्बत का क्या?
वो तो तुमसे मिलते ही हो जाये शायद,
इस लिए तुमसे मुलाक़ात अभी बाकी है,
और तुम्हारी अदायें भी कमाल है,
दिखती तो बहुत सख़्त हो, पर हो बहुत कोमल...
तुम्हे छूने को दिल करता, तुम्हारे माथे को मोहब्बत से चूमने को करता,
पर कुछ हदें तुमने अपनी बना रखी है तो कुछ मैंने,
इन्ही हदों के बीच मुहब्बत अपनी आख़री सांसे भर रहा।
कहानी अधूरी है, पर अच्छी है।

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