मैंने एक ग़ज़ल लिख रखी है








मैंने एक ग़ज़ल लिख रखी है तुम पर, सुनना हो तो बताना,
मेरा इश्क़ कैसा है, मुझे नही पता अगर हो ख़बर तुम्हे तो बताना।
मेरा उंगलियों का मसलना तुम्हें याद है, मुझे तुम्हारा गुस्सा करना...
एक उम्र गुज़र गयी हमारी तुमसे मोहब्बत में, अगर तुम्हें हमसफ़र बनना हो तो बताना।
मैंने एक ग़ज़ल लिख रखी है तुम पर, सुनना हो तो बताना,
अब बात ये पुरानी है, हमारी मोहब्बत एक कहानी है...
वो सुनाती है जब किस्से मोहब्बत के, उसकी आंखों में एक चमक होती,
मेरा उससे मिलना तो ज्यादा हुआ नहीं, इन 20 वर्षों के सफर में 3-4 मुलाक़ातों का किस्सा है।
कैसे कहूं अब वो मेरा हिस्सा है, 
उसका वजूद ही सिर्फ मेरी मोहब्बत नहीं, उसका एहसास भी मोहब्बत है।
हाँ... वो ग़ज़ल, सुननी हो तुम्हे तो बताना।



~Taरिफ  deवpuरिया★

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