सब एहसास का ही तो मसला है,
उन्होंने न हमे बताया होता और न एहसास हमारा बदला होता।
फिर भी कभी कभी सवाल खुद से कर बैठता..
यार तू भी तो दिल दे बैठा था किसी और को,
फिर ये इल्ज़ाम सिर्फ उसपे ही क्यों।
उसके एहसास का क्या?
क्या वो सिर्फ इसलिए सहे क्यों कि वो लड़की है।
यकीन तो उसपे मुझे अभी होना चाहिए था|
उसने कुछ न छुपाया मुझसे,
फिर क्यों ये अहसास थोड़ा कशमकश में है।
उसका तालुक तो नही उससे,
फिर भी ये एहसास पहले जैसा क्यों नहीं उससे?
बात मेरी और उसकी अब जो नरम हो पड़ी है,
कभी दिल धड़कता था उसका नाम सुन के...
जिसकी बातें मैं सबसे किया करता था,
आज उनसे उसकी बातें सुनने का मन नहीं करता|
ये एहसास क्या कुछ बदल गया हमरें दरमियाँ
उसकी नगाहें ताकती है मुझे,
शायद दिल मे भी प्यार हो...
पर क्या करें सब एहसास का ही तो मसला है|

1 टिप्पणियाँ
👌👌👌
जवाब देंहटाएं