भारत और पाकिस्तान के बीच रॉयल बग्गी का बंटवारा-

जैसा कि आप जानते है, आजादी के पश्च्यात भारत और पाकिस्तान दो अलग- अलग राष्ट्र बने और दोनों के मध्य संपत्ति का बंटवारा हुआ।
 आजादी के बाद अंग्रेजों द्वारा छोड़ गए ब्रिटिश वायसराय की बग्घी का बटवारा होना था। परंतु दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पायी।
तब भारत और पाकिस्तान के मध्य बग्घी के बंटवारे हेतु टॉस कराया गया, और भारत ने टॉस जीत कर बग्घी को अपने पास रखा।
रॉयल बग्घी का प्रयोग कौन करता है?
रॉयल बग्घी का प्रयोग भारत के प्रथम राष्ट्रपति के द्वारा किया गया था और 1984 तक इसका इस्तेमाल भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता रहा।
                            तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दिया गया।
बग्घी को खींचने वाले घोड़े
बग्घी को खींचने वाले घोड़ों की संख्या 6 होती है, जो भारतीय और आस्ट्रेलियाई मिक्स ब्रीड के होते है।
भारतीय नस्ल के घोड़े की लंबाई ज्यादा होती है।
जबकि भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई मिक्स ब्रीड के घोड़े की लंबाई बग्घी में फिक्स बैठती है।
 बग्घी की फिर से शुरुआत
2017 से बग्घी की शुरआत तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा की जाने लगी।
और जैसे अब यह भारतीय परंपरा का एक हिस्सा सा बन गया हो ऐसा प्रतीत होता है।
                                
                                     

                                                 तारिफ अन्सारी




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